Bharatiya Cinema Ka Safarnama
About the Book
भारत में सिनेमा ने 'धार्मिकता' से लेकर 'नग्नता' तक एक लम्बी दूरी तय की है। भारतीय सिनेमा की यह यात्र सामाजिक सुधारों-सरोकारों, स्वाधीनता संग्राम के प्रतिदायित्व बोध, राजनैतिक, ऐतिहासिक एवं साहित्यिक प्रवृत्तियों, एंग्री यंग मैन, एण्टीहीरोइज़्म, यथार्थवादी सिनेमा, आदि पड़ावों से होकर गुजरी है। सौ बरस की उम्र पूरी कर चुके भारतीय सिनेमा ने इन पड़ावों से होकर जनपक्षधारता, मनोरंजन, सामाजिकदायित्व बोध--सन्देश, नैतिक-सांस्कृतिक मूल्यों का निर्वहन, भूमण्डलीकृत विश्व के प्रभाव-दुष्प्रभाव, मौलिकता, प्रेरणा के नाम पर भोंडीनकल, आदि के अमृत-विष से दर्शक वर्ग को किस प्रकार प्रभावित-दुष्प्रभावित किया है, यह जानना रोचक होगा। यह पुस्तक भारत की सभी प्रमुख भाषाओं की फिल्मों की विविधा प्रवृत्तियों की व्याख्या करती है और भारतीय सिनेमा के इतिहास को विहंगम दृष्टि से पाठकों के समक्ष रखने का प्रयास करती है। पुस्तक में विख्यात फिल्मकार अडूरगोपाल कृणन का लम्बा साक्षात्कार उनके व्यक्तित्व के अनेक अनछुए पहलुओं को सामने लाता है तथा भारतीय सिनेमा के अन्य भाषाओं के साथ अन्तर्सम्बन्धों की भी पड़ताल करता है।
Language
Hindi
Publisher
Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
Publication date
25 July 2013
ISBN-13
ISBN-10
- Binding
- Hardcover
- Original price (MRP)
- Rs. 595.00
- Item weight
- 310 g
- Author
- Puneet Bisaria
- Language
- Hindi
- Publisher
- Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
- Publication date
- 25 July 2013
- ISBN-13
- 9788126917983
- ISBN-10
- 8126917989
Product details
- Binding
- Hardcover
- Original price (MRP)
- Rs. 595.00
- Item weight
- 310 g
- Author
- Puneet Bisaria
- Language
- Hindi
- Publisher
- Atlantic Publishers & Distributors (P) Ltd
- Publication date
- 25 July 2013
- ISBN-13
- 9788126917983
- ISBN-10
- 8126917989